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बैंक नोट की शुरुआत कैसे हुई।


मुद्राओं के तौर पर नोट के प्रयोग के प्रथम साक्ष्य चीन से मिले हैं। किन्तु आधुनिक बैंक नोट के प्रचलन को लेकर एक काफी दिलचस्प कहानी है ।
              बात 16 वीं शताब्दी की है । किसी शहर में एक स्वर्णकार (उस जमाने में स्वर्णकार बैंकर की तरह कार्य करते थे)रहते थे ।उनकी काफी विश्वसनीयता थी वे लोगों को ऋण भी दिया करते थे उन्होंने ऋण मांगने वाले को सोने चांदी के सिक्के ना देकर एक हस्तलिखित वचन पत्र देना शुरू कर दिया । मान लो किसी को 100 सोने के सिक्के चाहिए । तो वो एक कागज पर लिखकर  दे देता मैं 100 सोने के सिक्के देने का वचन देता हूँ । उनकी विश्वसनीयता ऐसी थी की उस वचन पत्र को शहर के अधिकतर लोग मानते थे । अर्थात उस वचन पत्र के बदले सभी लोग वस्तुओं का क्रय विक्रय करने को तैयार थे । स्थिति यह हो गई की अधिकतर वचन पत्र कभी स्वर्णकार के पास वापस आते ही नहीं थे तथा बाजार में चलते रहते थे ।इस वजह से स्वर्णकार के स्वर्णकोश भी सुरक्षित रह जाती थी तथा लोगों को ऋण भी मिल जाता था। इस वचन पत्र को रनिंग कैश नोट भी कहा जाता था । आज भी कई देशों में बैंक नोट पर “ मैं धारक _________ देने का वचन देता हूँ" लिखा रहता है। 
 आधुनिक काल में भी बैंक नोट कई देशों में स्वर्ण कोश अथवा विदेशी मुद्रा भंडार को ध्यान में रख कर ही जारी किए जाते हैं ।


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