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बैंक नोट की शुरुआत कैसे हुई।

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संविधान की प्रस्तावना

जैसा की हम सभी जानते है की 1946 ईस्वी में कैबिनेट मिशन के सलाह पर भारत में एक संविधान सभा का गठन किया गया । 9 दिसंबर 1946 ईस्वी को संविधान सभा की पहली बैठक सचिदानंद सिन्हा की अस्थाई अध्यक्षता में हुई। 11 दिसंबर 1946 ईस्वी को डॉ राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष बनाए गए । 13 दिसंबर 1946 ईस्वी को जवाहर लाल नेहरू द्वारा संविधान सभा के लिए उद्देश्य प्रस्ताव पास किया गया इसी प्रस्ताव बाद के दिनों में प्रस्तावना कहा गया तथा इसमें कुछ सामान्य संसोधन भी हुए । प्रस्तावना की विशेषता प्रस्तावना की शुरुआत “हम भारत के लोग से...” होती है । इसका अर्थ है की संविधान को उसकी शक्ति भारत की जनता से मिल रही है । प्रस्तावना में प्रयुक्त प्रमुख शब्दों के अर्थ 1.        सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न- इसका अर्थ यह है की भारत अपने अंदरूनी तथा बाह्य मामले पर अपने विवेक से फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है । भारत किसी बाह्य संस्था तथा अन्य देशों के दवाब में कोई कार्य नहीं करेगा । 2.        पंथनिरपेक्ष- भारत का संविधान किसी भी पंथ को नही...

मुद्रास्फीति समझें आसान भाषा में

मुद्रास्फीति क्या है     इसे हम एक छोटी कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे । रामू दस साल पहले एक सौ रुपया में दस किलो आलू खरीदता था किन्तु वह आज जब आलू खरीदने गया तो उसे सौ रुपये में मात्र 5 किलो आलू मिले । रामू व्यथित होकर दुकानदार से बोल उठा भाई आलू कितनी महंगी हो गई है । यहाँ हमने सिर्फ आलू का उदाहरण लिया लेकिन अगर हर वस्तु महंगी हो जाए तो रामू क्या कहेगा ?            जवाब है सभी वस्तुएं महंगी हो गई । लेकिन अगर इसे दूसरे शब्दों में कहें तो इसका एक उत्तर यह भी हो सकता है की रुपया की कीमत कम हो गई है । आसान भाषा में मुद्रास्फीति यही है । आम आदमी पर मुद्रास्फीति का असर मुद्रास्फीति का सीधा अर्थ है महंगाई का बढ़ना । निश्चित ही महंगाई आम आदमी पर अपना प्रभाव डालेगा । हर बार महंगाई का बुरा असर हो ऐसी भी कोई बात नहीं है । जब लोगों की आय अधिक मात्रा में बढ़े तो महंगाई का अधिक असर नहीं हो पाएगा । इसे आप एक उदाहरण से समझने का प्रयास करें। अगर आपकी आय 20% की दर से बढ़ जाए और महंगाई 2% की दर से बढ़े तो महंगाई का बुरा अस...